Kids poem - Hindi kavita - हिन्दी कविता : Lakadi ki Kathi Kathi pe ghora- लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा

Saturday, February 1, 2020

Lakadi ki Kathi Kathi pe ghora- लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा

लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा
घोडे की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा, दौड़ा, दौड़ा, घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा, दौड़ा, दौड़ा, घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा, दौड़ा, दौड़ा, घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
घोड़ा पोहचा चौक में, चौक में था नाई
घोड़े जी की नाई ने हजामत जो बनाई
टग-बग, टग-बग
चग-बग, चग-बग
घोड़ा पोहचा चौक, में चौक में था नाई
घोड़े जी की नाई ने हजामत जो बनाई
दौड़ा, दौड़ा, दौड़ा, घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा
घोड़े की दुम पे जो मारा हथौड़ा
दौड़ा, दौड़ा, दौड़ा, घोड़ा दुम उठा के दौड़ा
घोड़ा था घमंडी, पोहचा सब्जी मंडी
सब्जी मंडी बरफ पड़ी थी, बरफ में लग गई ठंडी
टग-बग, टग-बग
टग-बग, टग-बग
घोड़ा था घमंडी, पोहचा सब्जी मंडी
सब्जी मंडी बरफ
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