Kids poem - Hindi kavita - हिन्दी कविता : उठो लाल अब आँखें खोलो/सोहनलाल द्विवेदी

Friday, March 13, 2020

उठो लाल अब आँखें खोलो/सोहनलाल द्विवेदी

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उठो लाल अब आँखें खोलो,
पानी लायी हूँ मुंह धो लो।
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बीती रात कमल दल फूले,
उसके ऊपर भँवरे झूले।
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चिड़िया चहक उठी पेड़ों पे,
बहने लगी हवा अति सुंदर।
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नभ में प्यारी लाली छाई,
धरती ने प्यारी छवि पाई।
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भोर हुई सूरज उग आया,
जल में पड़ी सुनहरी छाया।
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नन्ही नन्ही किरणें आई,
फूल खिले कलियाँ मुस्काई।
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इतना सुंदर समय मत खोओ,
मेरे प्यारे अब मत सोओ।
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